Help People

बारिश हो, ठण्ड हो या गर्मी, ग़रीब इंसान अक्सर अनगिनत परेशानियां झेलता है रास्तों पर. अगर आप पैसो से या शरीर से समर्थ है, तो रास्ते में आपको हज़ारो लोग ऐसे मिलेंगे जिनकी आप मदद कर सकते है. मैं प्रोफेशनल भिखारियों की नहीं बात कर रहा जो गैंग का हिस्सा होते है. मैं उनकी बात कर रहा हूँ जिनके पास कुछ भी नहीं है, फिर भी आप उनको मांगता हुआ नहीं देखेंगे. उनकी आप ज़रूर मदद कीजिये किसी न किसी तरह. अगर आप ऑटो में जा रहे हो अकेले और रास्ते में किसी गरीब या माध्यम वर्गीय इंसान को भारी सामान उसी डायरेक्शन में ले जाते देखो, तो उनको लिफ्ट दे दो. ज़रूरी नहीं हर चीज़ पैसो से ही हो. ट्रैन में आप देखोगे कुली को अफ़्फोर्ड ना कर सकने वाले काफी बुज़ुर्ग दिखेंगे, ब्रिज पर सामान चढाने के लिए परेशान है. आप उनका सामान उठाने में मदद कर सकते हो. इस तरह छोटी छोटी काफी मदद आप कर सकते हो लोगों की. किसी को बिस्कुट या चूड़े का पैकेट, वड़ा पाव, सैंडविच, पानी की बोतल दे सकते हो. आप उस इंसान की जगह खुद को अगर रख कर सोचोगे तो आपको खुदको एहसास होगा कि आप उनकी काफी तरह से मदद कर सकते हो. अगर आपके पास भी कोई इस तरह के सुझाव हो तो ज़रूर अपने दोस्तों से साझा कीजिये. गाँधी जी का पसंदीदा भजन था संत नरसिंह मेहता का लिखा हुआ, वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे ।
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